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उत्तर-प्रदेश

पौराणिक इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है उत्तर प्रदेश के ये पर्यटन स्थल (Tourist Places of Uttar Pradesh)

These Tourist Places of Uttar Pradesh are Full of Mythological History, Culture and Natural Beauty

उत्तर प्रदेश अपने पर्यटन स्थलो (Tourist Places of Uttar Pradesh) के लिये बहुत प्रसिद्ध है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर पूर्वी भाग में स्थित जनसख्यां के आधार पर देश का सबसे बड़ा राज्य है और यदि क्षेत्रफल की दृष्टि के आधार पर देखा जाए, तो उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य है। यह राज्य धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों के लिए बहुत प्रसिद्ध है, खासकर यह राज्य इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि रामायण और महाभारत काल के धार्मिक स्थल और कई महत्वपूर्ण मंदिर आज भी यहां स्थित है।

उत्तर प्रदेश राज्य 4000 वर्षों से भी पुराना राज्य है। 7वीं शताब्दी से 11वी शताब्दी तक इस राज्य में कन्नौज गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य का प्रमुख केन्द्र हुआ करता था। इसकी पश्चिमी सीमायें देश की राजधानी नई दिल्ली से लगी हुई हैं। यहां पर राजाओं, महाराजाओं तथा मुगल बादशाहों की बेमिसाल इमारतें आज भी मौजूद है, जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से लोग यहां पर आते है।

अयोध्या (Ayodhya)

उत्तर प्रदेश राज्य में सरयू नदी के तट पर स्थित अयोध्या एक प्राचीन शहर है। अयोध्या श्री राम जी की जन्मभूमि भी है और हिंदुओं के सात पवित्र शहरों में से एक है। राम मंदिर की वजह से पिछले कुछ समय से अयोध्या भारत का सबसे विवादित मुददा बन चुका हैं जोकि लम्बे से समय चला आ रहा हैं। अयोध्या में आप प्रकृति के अलौकिक सौंदर्य को देखकर रोमांचित हो जाएंगे। यहां पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक कई महत्वपूर्ण स्थान है। अयोध्या का उल्लेख महाकाव्य रामायण सहित कई कहानियों में भी किया जाता है।

भारत का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली अयोध्या में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। जब रावण का वध करके श्री राम घर लौटे थे, तो अयोध्या विजयी राम के स्वागत के लिए मिट्टी के दीयों से जगमगा उठा था। हर साल दीवाली के दौरान अयोध्या को लाखों दीयों से सजाया जाता है। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से चार का जन्म भी अयोध्या में हुआ था।

रामायण में भगवान श्री राम का प्राचीन राज्य कौशल की राजधानी अयोध्या थी। अयोध्या मुख्य रूप से एक धार्मिक स्थल है। यहां राम मंदिर के अलावा, छोटी छावनी, बहु बेगम का मकबरा, तुलसी स्मारक भवन, दंत धावन कुंड, सरयू नदी आदि भव्य धार्मिक स्थल हैं।

मथुरा (Mathura)

उत्तर प्रदेश में मथुरा एक ऐसा स्थान है, जिसकी खूबसूरती के कायल भारतीय ही नहीं, अपितु विदेशी भी हैं। मथुरा श्री कृष्ण का जन्मस्थान होने के कारण इसको श्री कृष्ण की नगरी भी कहते हैं। मथुरा यमुना नदी के किनारे स्थित है। ‌यहाँ दो सबसे महत्वपूर्ण मंदिर द्वारकाधीश मंदिर और गीता मंदिर हैं। इसके आलावा मथुरा में राधा कुंड, गोवर्धन पहाड़ी, संग्रहालय, कंस किला, रंगजी मंदिर, बरसाना घाट आदि घूमने की जगह हैं।

मथुरा को उत्तर प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थल माना जाता है क्योंकि यह वही स्थान है, जहां भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था और जिस जेल में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। वह अब पर्यटकों के देखने के लिए प्रदर्शित है। मथुरा में स्ट्रीट फूड का भी स्वादिष्ट इतिहास रहा है जैसे; चाट, आलू-पूरी, जलेबी और गुलाब-जामुन आदि बहुत मशहूर है और मथुरा में सबसे मशहूर मथुरा के पेड़े हैं। जब भी आप मथुरा आएं तो इन पेड़ों का स्वाद जरूर लें।

आगरा (Agra)

उत्तर प्रदेश में घूमने के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक आगरा यमुना नदी के तट पर स्थित है। आगरा का ताजमहल दुनिया भर में प्रसिद्ध है, जो मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज़ की याद में बनवाया था। यह यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया है। इसके अलावा दो ओर यूनेस्को विश्व धरोहर फतेहपुर सीकरी और आगरा का किला प्रसिद्ध है। आगरा मुगल साम्राज्य के स्थापत्य इतिहास और विरासत की एक झलक है। इसके अलावा आप आगरा में फतेहपुर सीकरी, आगरा का किला, चीनी का राउजा, जामा मस्जिद, जहांगीर किला, मोती मस्जिद, अंगूरी बाग, पंच महल, सुर सरोवर पक्षी अभ्यारण्य इत्यादि बेहतरीन जगहों पर घूमने जा सकते है।

आगरा में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सिकरी पिकनिक के लिए बेहद ही खूबसूरत जगह हैं। इसके साथ ही यहां और भी एतिहासित धरोहर और बाग हैं। इस शहर में आप अकबर का मकबरा भी देख सकते है। आगरा इतिहास के दीवानों, स्थापत्य के शौकीनों और खाने-पीने के शौकीनों के लिए स्वर्ग है। आगरा में आगरा का पेठा बहुत प्रसिद्ध है और यह संगमरमर की कलाकृतियों के लिए भी प्रसिद्ध है।

वाराणसी (Varanasi)

वाराणसी हिंदुओं का धर्मिक शहर है। इसी स्थान को मंदिरों का शहर भी माना जाता है। वाराणसी उत्तर प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। वाराणसी को काशी और बनारस के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ सबसे प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर है, जो कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसके अलावा यहां तुलसी मानसा मंदिर, दुर्गा मंदिर, सारनाथ मंदिर, रामनगर किला, आलमगीर मस्जिद, गोडोवालिया मार्केट, चुनार का किला आदि अनेकों पर्यटन स्थल हैं। भारत की यह प्राचीन नगरी गंगा नदी के तट पर बसी हुई है। इसे महादेव की नगरी भी कहां जाता है। वाराणसी अनेकों घाट प्रसिद्ध है जैसे; प्रयाग घाट, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, और मणिकर्णिंका घाट आदि।

वाराणसी संसार के प्राचीन शहरों में से एक है। वाराणसी की संस्कृति का गंगा नदी और धार्मिक महत्त्व से अटूट रिश्ता है। शास्त्रीय संगीत कई कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में रहे हैं जैसे; कबीर, शिवानन्द गोस्वामी, वल्लभाचार्य, रविदास, स्वामी रामानंद, जयशंकर प्रसाद, त्रैलंग स्वामी, गिरिजा देवी, मुंशी प्रेमचंद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पंडित रवि शंकर, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खां आदि कुछ हैं। स्कन्द पुराण, रामायण, महाभारत एवं प्राचीनतम वेद ऋग्वेद सहित कई हिन्दू ग्रन्थों में वाराणसी का महत्त्व बताया हैं।

वृंदावन (Vrindavan)

वृंदावन श्री कृष्ण की बाल लीलाओं की जगह है। यहाँ हर साल भगवान श्री कृष्ण के भक्तों का सुंदर मेला लगता है। यहां होली के त्योहार को बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। वृंदावन में अनेकों मंदिरो का अपना प्राचीन इतिहास है। यहां के प्रेम मंदिर की लोकप्रियता विदेशों में भी है। इसके अलावा वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, निधिवन मंदिर, गोविंद देव जी मंदिर, मदन मोहन मंदिर, केसी घाट, श्री वृंदाकुंड, पागल बाबा मंदिर, कुसुम सरोवर इत्यादि प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं।

वृंदावन में सबसे प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर और विश्व प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर हैं। वृंदावन को श्री कृष्ण का बचपन का निवास माना जाता है। वृंदावन दो छोटे पेड़ों के नाम से जोड़कर बना है। वृंदा (अर्थ तुलसी) और वन (अर्थ ग्रोव) माना गया है। वृंदावन एक पवित्र स्थान है इसलिए लोग यहां अपने सांसारिक जीवन को त्यागने के लिए आते हैं।

चित्रकूट धाम (Chitrakoot Dham)

भारत में बहुत से प्राचीन तीर्थस्थल हैं, जिनमे से चित्रकूट धाम एक विशेष धाम हैं। चित्रकूट धाम वह स्थान है, जहा श्री राम जी में वनवास के समय 11 साल बिताए थे। भारत के प्रमुख विद्वानों ने अपनी रचनाओं में भी चित्रकूट की महिमा का बखान किया हैं। चित्रकूट धाम सदियों से ही ऋषि-मुनियों की तपस्या का विशेष स्थल रहा है, यह स्थल बहुत सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक महत्व रखता है।

चित्रकूट मंदाकिनी नदी के किनारे पर बसा हुआ है। मंदाकिनी नदी के किनार बने रामघाट और कामतानाथ मंदिर में पूरे साल श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। इसी स्थान पर ऋषि अत्रि और सती अनसुइया ने ध्यान लगाया था। ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने चित्रकूट में ही सती अनसुइया के घर जन्म लिया था।

प्रयागराज (Prayagraj)

उत्तर प्रदेश के बड़े जनपदों में से प्रयागराज एक है। यह यमुना, गंगा तथा गुप्त सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित है। संगम स्थल को त्रिवेणी कहा जाता है। यहां हिंदुओं के लिए अनगिनत मंदिर और त्रिवेणी संगम स्थित हैं। यहां खुसरो बाग जैसे मकबरे और कई मस्जिदें भी हैं। कुंभ मेले से लेकर इलाहाबाद किले तक, ऐतिहासिक चमत्कारों और शानदार वास्तुकला देखने को मिलती है।

प्रयागराज की महत्ता वेदों और पुराणों में विस्तार से बताई गई है। इसे तीर्थों का राजा भी कहा जाता है। प्रयागराज में दान, कर्म, पुण्य, यज्ञ आदि के साथ-साथ त्रिवेणी संगम का बहुत महत्व है। यहाँ स्नान करने से मनुष्य अपने सभी पापो से मुक्त हो जाता है। प्रत्येक 12 वर्ष में महाकुम्भ और 6 बर्ष में अर्ध कुम्भ मेले का आयोजन इसी जगह पर होता है।

लखनऊ (Lucknow)

उत्तर प्रदेश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर, लखनऊ एक बहुत ही सुंदर शहर है। गोमती नदी के तट पर स्थित यह एक नवाबी शानो-शौकत वाला शहर है। यह शहर अपने इतिहास, वास्तुकला, साहित्य और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। पुराना लखनऊ शहर ज्यादातर हलचल, बिरयानी आउटलेट, जीवंत गलियों कबाब और लाखनवी चिकेन बाजार के अलावा थोक आभूषण भंडार के लिए भी जाना जाता था और नया लखनऊ विभिन्न संस्कृतियों, चौड़ी सड़कों, शॉपिंग मॉल और पार्कों के लिए प्रसिद्ध है।

पर्यटन के लिहाज से लखनऊ बेहद ही खूबसूरत जगह है। यहां मुगल गेटवे रूमी दरवाज़ा, भूलभुलैया, हज़रतगंज मार्केट, लखनऊ चिड़ियाघर, अंबेडकर मेमोरियल पार्क, इमामबाड़ा, फिरंगी महल आदि अनेक पर्यटन स्थल हैं। लखनऊ एक ऐसा शहर है, जो अपने आकर्षक पर्यटन स्थलों से पर्यटकों को एक अनोखी मुस्कान छोड़ देता है। नवाबों के शासन के समय यह शहर भोजन, संगीत, नृत्य, कला, हस्तशिल्प आदि सहित सभी क्षेत्रों में विकसित हुआ।

सारनाथ (Sarnath)

सारनाथ उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में स्थित एक गाँव है। यह गंगा और वरुण नदियों के संगम के पास स्थित है। गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला धर्मोपदेश इसी स्थान पर दिया था। यहाँ से ही उन्होंने “धर्म चक्र प्रवर्तन” प्रारम्भ किया था। यह स्थान बौद्ध धर्म और जैन धर्म के तीर्थ यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है और यह बौद्ध धर्म के चार सबसे प्रमुख तीर्थों में से एक है। यहाँ पर बौद्ध मठ ध्यान करने के लिये उत्तम स्थल हैं

सारनाथ में घना वन था और मृग-विहार किया करते थे। सारनाथ में हिरण पार्क है। इसी पार्क में गौतम बुद्ध ने पहली बार धम्म को पढ़ाया था। भारत का राष्ट्रीय चिह्न यहीं के अशोक स्तंभ के मुकुट की द्विविमीय अनुकृति है। इस समय सारनाथ एक तीर्थ स्थल और पर्यटन स्थल के रूप में लगातार वृद्धि की ओर जा रहा है।

सारनाथ में सारंगनाथ महादेव का मन्दिर है, जहां सावन के महीने में हिन्दुओं का मेला लगता है और जैन ग्रन्थों में इसे सिंहपुर कहा जाता है। सारनाथ में जैन मन्दिर, अशोक का चतुर्मुख सिंहस्तम्भ, भगवान बुद्ध का मन्दिर, धमेख स्तूप, चौखन्डी स्तूप, राजकीय संग्राहलय, चीनी मन्दिर, मूलंगधकुटी और नवीन विहार हैं।

गोरखपुर (Gorakhpur)

उत्तर प्रदेश के पूर्व में नेपाल की सीमा के पास गोरखपुर है। यह एक प्रसिद्ध धार्मिक संत गोरखनाथ का घर है। यहां संत गोरखनाथ को समर्पित नाथ संप्रदाय का सबसे सम्मानित मंदिर है। मंदिर के परिसर के अंदर एक कृत्रिम तालाब भी है। यह शहर कई ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों और हिंदू धार्मिक ग्रंथों के प्रकाशक गीता प्रेस का भी घर है। गोरखपुर में रामगढ़ ताल एक विशाल झील है। यह गोरखपुर की खूबसूरत जगहों में से एक है। यहाँ कई पर्यटक झील में तैरने और समय बिताने आते है।

गोरखपुर में भगवान विष्णु की चतुर्भुज प्रतिमा है। अंग्रेज इस प्रतिमा को उठाकर लन्दन ले गए थे और वहां रॉयल म्यूजियम में ये प्रतिमा रखवा दी गई थी। मझौली राज स्टेट की महारानी श्याम कुमारी इस प्रतिमा को वहां से जीतकर ले आई और अपने स्व. पति राजा कौशल किशोर प्रसाद मल्ल की याद में एक मंदिर बनवाया, जिसमे ये प्रतिमा रखी गयी।

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