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फुटबॉल

फुटबॉल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और नियम

Important Facts and Rules Related to Football

फुटबॉल पूरे विश्व में बहुत ही लोकप्रिय खेल है। यह एक समूह संबंधी खेल है, जिसमें एक टीम में 11 खिलाड़ी होते है तथा यह दो टीमों के बीच खेला जाने वाला खेल है। यह खेल एक बहुत बड़े आयताकार मैदान में खेला जाता है और मैदान के मध्य आमने-सामने दोनों छोरों पर गोल पोस्ट होते है।

इस खेल में खिलाडी अपने पैर से गेंद को मारकर विपक्षी टीम के पाले में गोल करने का प्रयास करते है और विपक्षी टीम उन्हें रोकने तथा उनके पाले में गोल करने का प्रयास करती है, जो भी टीम ज्यादा गोल करती है, वह जीत जाती है।

फुटबॉल की शुरुआत नागेन्द्र प्रसाद सरबधिकारी ने की थी। उन्होंने 1877 में हेयर स्कूल में फुटबॉल खेल टीम बनाकर खेला, जिसके बाद इस खेल का प्रचलन बढ़ गया और इसलिए नागेन्द्र प्रसाद सरबधिकारी को फुटबॉल का जनक कहा जाने लगा। हमारे भारत देश में सबसे पहले पश्चिम बंगाल, मणिपुर, सिक्किम, केरल, गोआ और मिजोरम आदि राज्यों में फुटबॉल खेल की शुरुआत हुई।

खेल के नियम (Rules Of The Game)

फुटबॉल खेल की शुरुआत टॉस से की जाती है। टॉस में जीतने वाले कप्तान को यह निश्चित करना होता है कि उसकी टीम गोल पर अटैक करेगी या फिर गेंद को किक ऑफ (किक मारना) करेगी।

समय (Time)

फुटबॉल के मैच में 90 मिनट का समय दिया जाता है, जिसे 45-45 मिनट के दो भागों में बाँट दिया जाता है, इसी समयावधि में दोनों टीमें आपस में एक-दूसरे के खिलाफ ज्यादा-से-ज्यादा गोल करने का प्रयास करती है।

खिलाड़ी (Players)

फुटबॉल की टीम में कुल खिलाड़ियों की संख्या 11 होती है। फुटबॉल के इन 11 खिलाड़ियों में स्ट्राइकर, डिफेंडर, मिडफील्डर्स और गोलकीपर इत्यादि होते हैं।

  • स्ट्राइकर (Striker) : स्ट्राइकर का मुख्य कार्य गोल मारना या करना होता है।
  • डिफेंडर्स (Defenders) : डिफेंडर्स विपक्षी टीम को गोल करने से रोकते है।
  • मिडफिल्डर्स (Midfielders) : मिडफिल्डर्स विपक्षी टीम के खिलाड़ियों से बॉल छीनकर अपने पक्ष के खिलाड़ियों को गेंद देने का कार्य करते है।
  • गोलकीपर (Goalkeeper) : गोलकीपर गोल पोस्ट के सामने खड़े रहकर गोल होने से रोकने का कार्य करता है।

फुटबॉल किक (Football Kicks)

  • किक-ऑफ (Kick-off) : टॉस जीतने वाली टीम जब किक मारकर (Kick-off) खेल की शुरुआत करती है, उसे किक-ऑफ कहते है।
  • गोल किक (Goal Kick) : गोल किक को अनेक क्षेत्रों में गोलकीपर किक भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया से खेल को फिर से शुरू किया जाता है।
  • पेनल्टी किक (Penalty Kick) : यदि दूसरी टीम कोई फॉउल करती है, तो खेल को पहली टीम के द्वारा पेनाल्टी किक देकर दोबारा शुरू किया जाता है। पेनाल्टी किक में एक खिलाड़ी को गोल पर एक शॉट लेने की अनुमति दी जाती है और यह किक गोलकीपर के ठीक सामने से ली जाती है।
  • फ़्री किक (Free Kick) : जब दूसरी टीम द्वारा कानूनों का उल्लंघन किया जाता है, तब पहली टीम को खेल फिर से शुरू करने के लिए इस विधि का प्रयोग करना पड़ता है।
  • अन्दर फेंकना (Throw-in) : जब गेंद दूसरी टीम के खिलाडी से मैदान के किनारे से बाहर निकल जाती है, तो पहली टीम थ्रो-इन की प्रक्रिया से खेल को दोबारा शुरू करती है।
  • कॉर्नर किक (Corner Kick) : जब गेंद गोल लाइन पर खेल से बाहर हो जाती है, बिना गोल किए और बचाव दल के किसी सदस्य द्वारा आखिरी बार छुआ गया हो, तब खेल को फिर से शुरू करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है।
  • अप्रत्यक्ष मुफ्त किक (Indirect Free Kick) : यदि दूसरी टीम के किसी खिलाडी से बिना किसी विशिष्ट फाउल (Foul) के बॉल मैदान से बाहर चली जाए तथा मैच रुक जाए, तब पहली टीम को इनडायरेक्ट फ्री किक उसके प्रतिफल रूप में में दी जाती है।
  • ड्रॉप्ड गेंद (Dropped-Ball) : जब सामान्य गेम प्ले, बेईमानी या कदाचार के अलावा अन्य किसी कारण से खेल को रोक दिया जाता है, तब इस विधि का प्रयोग किया जाता है।

फुटबॉल में फाउल के नियम (Foul Rules In Football)

  • पीला कार्ड (Yellow Card) : यदि किसी भी टीम का कोई भी खिलाड़ी किसी प्रकार का दुर्व्यवहार करता है, तब रेफरी के द्वारा उस खिलाड़ी को यह एक पीला कार्ड सावधानी या चेतावनी के रूप में दिया जाता है। यह पीला कार्ड खिलाड़ियों को शेष खेल के लिए मैदान पर रहने का एक और मौका देता है।
  • रेड कार्ड (Red Card) : यदि एक ही खिलाड़ी को एक ही मैच में दो पीले कार्ड मिले हैं, तो उसका अर्थ है कि उसे लाल कार्ड दिया जा चुका हैं। लाल कार्ड का अर्थ है निष्कासन अर्थात खेल से बाहर। फिर उस उसकी टीम को दूसरा खिलाडी नहीं दिया जाता, अर्थात उसकी टीम को शेष बचे हुए खिलाड़ियों से ही आगे खेलना होगा।

ऑफसाइड (Offside)

इस नियम में खिलाड़ी को अपने प्रतिद्वंद्वी से गेंद का बचाव करते है और उनके सामने नहीं जा सकते। यदि विपक्षी टीम की सीमा के पास कोई खिलाड़ी ऐसा करता है, तो उसे फाउल करार दिया जाता है।

पेनल्टी शूट-आउट (Penalty Shoot-Out)

जब मैच का समय समाप्त होने के बाद स्कोर बराबर हो जाता है, अर्थात खेल का कोई नतीजा नहीं निकलता, तब पेनल्टी शूट-आउट द्वारा ही परिणाम निर्धारित किया जाता है। यह एक टाई-ब्रेकिंग विधि है।

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