Famous and Popular Tourist Places of Assam
असम में अनेकों प्रसिद्ध व दर्शनीय पर्यटन स्थल है। (Tourist Places of Assam). असम पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य है, जोकि अपने वन्य जीवन, पुरातत्व स्थलों और चाय बागानों के लिए प्रसिद्ध है। असम भारत का एक सीमान्त राज्य है, जोकि चतुर्दिक, सुरम्य पर्वतश्रेणियों से घिरा हुआ है। असम में पश्चिम की ओर सबसे बड़े शहर गुवाहाटी में रेशम के बाज़ार और पहाड़ों की चोटी पर कामाख्या मंदिर है और उमानंद मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी में मयूर द्वीप पर स्थित है।
असम को पूर्व-भारत का गेटवे ऑफ इंडिया (Gateway of India) भी कहा जाता है क्योंकि इस राज्य की सीमा उत्तर में भूटान और अरुणाचल प्रदेश राज्य को छूती है। असम की राजधानी, दिसपुर, गुवाहाटी का एक उपनगर है। हाजो और मदन कामदेव का प्राचीन तीर्थ स्थल, एक मंदिर परिसर के खंडहर, पास में अवस्थित हैं।
असम में सात राष्ट्रीय उद्यान देहिंग पटकाई, रायमोना, काजीरंगा, मानस, नामेरी, ओरंग और डिब्रू-सैखोवा मौजूद है।
इस लेख के माध्यम से हम आपको असम में घूमने की जगह के बारें में बताने जा रहे है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park)
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान भारत के असम राज्य का एक राष्ट्रीय उद्यान है और यह उद्यान देश की 36 वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में से एक है। यह उद्यान एक सींग का गैंडा (भारतीय गेंडा) के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इतना ही नहीं, यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व विरासत स्थलों की सूची में इसका प्रमुख स्थान है।
इस उद्यान में आपको गेंडों के अतिरिक्त एशियाई जंगली पानी भैंस, स्वाम्प हिरण, एशियाई हाथी, जंगली भैंस, हिरन, स्वैम्प, जंगली भैंस, चीनी पैंगोलिन, गिबन्स, बंगाल फॉक्स, रयल भालू, सिवेट्स, तेंदुए, और फ्लाइंग गिलहरी और टाइगर इत्यादि जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने को मिलेंगें। यह एक टाइगर रिजर्व भी है क्योंकि इसमें शाही बंगाल टाइगर्स की एक बड़ी आबादी रहती है।
कामाख्या मंदिर (Kamakhya Temple)
यह मंदिर असम में गुवाहाटी के पश्चिमी भाग में नीलांचल पहाड़ी पर स्थित हैं। कामाख्या देवी का मंदिर भारत के प्रमुख मंदिरों में से एक हैं। यह एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल और असम में एक अद्वितीय मंदिर है। कामाख्या मंदिर भक्तों के बीच असम का एक प्रमुख पर्यटन स्थल माना गया है।
मां कामाख्या मंदिर को पृथ्वी पर 51 शक्तिपीठों में सबसे पवित्र और सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। इस मंदिर में माँ भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है।
मान्यता है कि जिन-जिन स्थानों पर देवी सती के अंग गिरे थे, वे सभी स्थान शक्ति पीठ में परिवर्तित हो गए। ये स्थान अत्यंत पवित्र और पावन तीर्थ माने जाते है तथा ये स्थान पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं। कामाख्या मंदिर भी इन्हीं पवित्र तीर्थों में से एक है।
माजुली द्वीप (Majuli Island)
माजुली, असम के ब्रह्मपुत्र नदी के मध्य में बसा पर्यावरण के अनुकूल और प्रदूषण रहित ताजे पानी का एक बड़ा नद्य द्वीप है। यह द्वीप जोरहाट शहर से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह करीब-करीब 880 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। माजुली द्वीप विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीपों में से एक है। माजुली में घूमने के लिए सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च के बीच माना जाता है।
7वीं सदी में यह द्वीप एक बड़े क्षेत्र का एक हिस्सा हुआ करता था और इसे माजोली के नाम से जाना था, जिसका अर्थ दो समानांतर नदियों के बीच की जगह है। उस ब्रह्मपुत्र नदी को लोहित, लुहित या लुईत के नाम से जाना जाता था। अब वर्तमान में इस द्वीप का दक्षिणी भाग एक पक्षी प्रेमी का स्वर्ग है।
जोरहाट (Jorhat)
भारत के असम राज्य के जोरहाट ज़िले में भोगदोई नदी के किनारे जोरहाट नामक एक महत्वपूर्ण शहर उपस्थित है। यह असम के प्रमुख शहरों में से एक है। जोरहाट शब्द, दो शब्दों से मिलकर बना है – जोर यानि दो और हाट अर्थात बाजार। यह शहर ज़िले का मुख्यालय भी है।
जोरहाट शहर की स्थापना 18वीं सदी के अंतिम दशक में हुई थी। उस सदी में यहां पर दो साप्ताहिक बाजार, इस क्षेत्र में मुख्य आकर्षण थे – चौकी हाट और मचरारहाट, जो भगदोई नदी के दोनों ओर स्थित है, तभी इस शहर का नाम जोरहाट रखा गया था। जोरहाट शहर में कई ऐतिहासिक अवशेष है, जोकि अहोम शासन के शाही दिनों का विवरण देते है। यहां पर विभिन्न संस्कृतियों और जातियों से जुडे लोग रहते है, जिनमें असमिया, मुस्लिम, पंजाबी, बिहारी और मारवाड़ी प्रमुख हैं।
शिवसागर शिवडोल (Shivsagar Shivdol)
असम राज्य के शिवसागर ज़िले के मध्य स्थित तीन मन्दिर स्थित है और एक बहुत विशाल संग्रहालय का समूह है, जोकि असम में बहुत ही प्रसिद्ध है। असम या असमिया में डोल का मतलब मन्दिर होता है। ये मंदिर शिवसागर शिवडोल के नाम से विख्यात है। ये सभी मंदिर शिवसागर के तालाब के किनारे पर स्थित हैं। इस तालाब को बरपुखुरी के नाम से जाना जाता है।
इन मंदिरों में शिवडोल, विष्णुडोल और देवडोल शामिल है। ये मंदिर जिस तालाब के किनारे है, उस तालाब का निर्माण 1731 से 1738 के मध्य हुआ था। इन मंदिरों का निर्माण 1734 में हुआ था।
नवग्रह मंदिर (Navagraha Temple)
असम के गुवाहाटी शहर के दक्षिण-पूर्वी भाग में चित्रचल नामक पहाड़ी पर नौ खगोलीय पिंडों के मंदिर के रूप में नवग्रह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यह मंदिर सबसे महत्वपूर्ण आकाशीय पिंडों के रूप में विश्व विख्यात है। यह नवग्रह मंदिर ज्योतिषी और खगोलीय अनुसंधान के लिए बहुत बड़ा केंद्र है।
18वीं शताब्दी में अहोम राजा राजेश्वर सिंह ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। वर्ष 1897 में इस जगह पर भारी भूकंप आया था, जिस कारण मंदिर का बहुत बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया था। उसके पश्चात लोहे के चदर की सहायता से इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया था।
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